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mahabharat 13.168.46: वे भगवान नारायण हरि देवताओं के लोक में सर्वश्रेष्ठ हैं। जो लोग उन्हें पूजते हैं, वे उनकी पूजा करते हैं। जो लोग उनका आदर करते हैं, वे उनका आदर करते हैं। इसी प्रकार जब उनकी पूजा की जाती है, तब वे पूजा करते हैं और जब उनकी पूजा या स्तुति की जाती है, तब वे पूजा या स्तुति करते हैं।॥ 46॥   |   mahabharat अध्याय 13.168: वंशपरम्पराका कथन और भगवान‍् श्रीकृष्णके माहात्म्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.168.46 
दिवि श्रेष्ठो हि भगवान‍् हरिर्नारायण: प्रभु:।
वन्दितो हि स वन्देत मानितो मानयीत च।
अर्हितश्चार्हयेन्नित्यं पूजित: प्रतिपूजयेत्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
वे भगवान नारायण हरि देवताओं के लोक में सर्वश्रेष्ठ हैं। जो लोग उन्हें पूजते हैं, वे उनकी पूजा करते हैं। जो लोग उनका आदर करते हैं, वे उनका आदर करते हैं। इसी प्रकार जब उनकी पूजा की जाती है, तब वे पूजा करते हैं और जब उनकी पूजा या स्तुति की जाती है, तब वे पूजा या स्तुति करते हैं।॥ 46॥
 
That Lord Narayana Hari is the best in the world of gods. He worships those who worship him. He respects those who respect him. In the same way, when he is worshiped, he worships and when he is worshiped or praised, he worships or praises.॥ 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)