श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 168: वंशपरम्पराका कथन और भगवान‍् श्रीकृष्णके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  13.168.42 
धर्माणां देशिक: साक्षात् स भविष्यति धर्मभाक्।
धर्मवद्भि: स देवेशो नमस्कार्य: सदोद्यतै:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
इतना ही नहीं, वह धर्मोपदेश करने वाला सच्चा धर्माचार्य होगा और धर्मफल का भागी होगा। अतः धर्मात्मा पुरुषों को सदैव उत्साहित रहकर देवाधिदेव भगवान वासुदेव को नमस्कार करना चाहिए। 42॥
 
Not only this, he will be a real Dharmacharya who preaches religions and will be a partaker of Dharmaphala. Therefore, pious people should always remain excited and salute the God of Gods, Lord Vasudev. 42॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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