श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 168: वंशपरम्पराका कथन और भगवान‍् श्रीकृष्णके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  13.168.38 
यो हि मां द्रष्टुमिच्छेत ब्रह्माणं च पितामहम्।
द्र्रष्टव्यस्तेन भगवान‍् वासुदेव: प्रतापवान्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
जो मेरा और पितामह ब्रह्माजी का दर्शन करना चाहता है, उसे महिमावान भगवान वासुदेव का दर्शन करना चाहिए ॥38॥
 
The one who wants to have darshan of me and grandfather Brahmaji, should have darshan of the glorious Lord Vasudev. 38॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd