श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 168: वंशपरम्पराका कथन और भगवान‍् श्रीकृष्णके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 30-32
 
 
श्लोक  13.168.30-32 
तस्य त्ववरज: पुत्र: शूरो नाम भविष्यति।
तेषां विख्यातवीर्याणां चरित्रगुणशालिनाम्॥ ३०॥
यज्वनां सुविशुद्धानां वंशे ब्राह्मणसम्मते।
स शूर: क्षत्रियश्रेष्ठो महावीर्यो महायशा:।
स्ववंशविस्तरकरं जनयिष्यति मानद:॥ ३१॥
वसुदेव इति ख्यातं पुत्रमानकदुन्दुभिम्।
तस्य पुत्रश्चतुर्बाहुर्वासुदेवो भविष्यति॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
उसका छोटा पुत्र शूर नाम से विख्यात होगा। वे समस्त यदुवंशी यशस्वी, वीर, सदाचारी, यज्ञ करने वाले, शुद्ध आचरण और विचारों वाले होंगे। उनका कुल ब्राह्मणों द्वारा प्रतिष्ठित होगा। उस कुल में महापराक्रमी, यशस्वी और सम्माननीय क्षत्रिय-शिरोमणि शूर वसुदेव नामक पुत्र को जन्म देगा जो अपने कुल का विस्तार करेगा, जिसका दूसरा नाम अनकदुन्दुभि होगा। उसका पुत्र चतुर्भुज भगवान वसुदेव होगा।
 
His younger son will be famous by the name of Shoor. All those Yaduvanshis will be famously brave, adorned with good conduct and virtues, will perform sacrifices and will have pure conduct and thoughts. Their clan will be respected by the Brahmins. In that clan, the great brave, famous and respectful Kshatriya-Shiromani Shoor will give birth to a son named Vasudeva who will expand his clan, whose other name will be Anakadundubhi. His son will be the four-armed Lord Vasudeva.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)