श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 168: वंशपरम्पराका कथन और भगवान‍् श्रीकृष्णके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  13.168.27 
बुधात् पुरूरवाश्चापि तस्मादायुर्भविष्यति।
नहुषो भविता तस्माद् ययातिस्तस्य चात्मज:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
जब वह अपनी कन्या अवस्था में बुध के साथ समागम करेगी, तब पुरुरवा का जन्म होगा। पुरुरवा का आयु नामक पुत्र होगा। आयु का नहुष और नहुष का ययाति नामक पुत्र होगा।॥27॥
 
When she has intercourse with Mercury in her girlhood, Pururava will be born. Pururava will have a son named Ayu. Ayu will have a son named Nahush and Nahush will have Yayati.॥27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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