श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 168: वंशपरम्पराका कथन और भगवान‍् श्रीकृष्णके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 15-17
 
 
श्लोक  13.168.15-17 
शार्ङ्गचक्रायुध: खड्गी सर्वनागरिपुध्वज:।
उत्तमेन स शीलेन दमेन च शमेन च॥ १५॥
पराक्रमेण वीर्येण वपुषा दर्शनेन च।
आरोहेण प्रमाणेन धैर्येणार्जवसम्पदा॥ १६॥
आनृशंस्येन रूपेण बलेन च समन्वित:।
अस्त्रै: समुदित: सर्वैर्दिव्यैरद्भुतदर्शनै:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
शार्ङ्गधनुष, सुदर्शन चक्र और नंदक नामक तलवार उनके आयुध हैं। उनका ध्वज सभी सर्पों के शत्रु गरुड़ के प्रतीक से सुशोभित है। वे उत्तम शील, लज्जा, साहस, पराक्रम, वीर्य, ​​सुन्दर शरीर, उत्तम दृष्टि, सुडौल आकृति, धैर्य, सरलता, मृदुता, सौन्दर्य और बल आदि सद्गुणों से युक्त हैं। सभी प्रकार के दिव्य और अद्भुत अस्त्र-शस्त्र उनके पास सदैव विद्यमान रहते हैं। 15-17
 
Sharngdhanush, Sudarshan Chakra and the sword named Nandak are his weapons. Their flag is adorned with the symbol of Garuda, the enemy of all serpents. He is blessed with good qualities like good modesty, shame, courage, bravery, semen, beautiful body, good vision, well-shaped figure, patience, simplicity, softness, beauty and strength etc. All types of divine and wonderful weapons are always present with him. 15-17
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)