Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.167.60-61: भीष्म कहते हैं - युधिष्ठिर! पार्वती के मुख से स्त्री के कर्तव्यों का वर्णन सुनकर देवाधिदेव महादेव ने गिरिराज की राजकुमारी का बहुत आदर किया और वहाँ अपने अनुयायियों सहित आये हुए सभी लोगों को वहाँ से चले जाने का आदेश दिया। तब सभी भूत, नदियाँ, गन्धर्व और अप्सराएँ भगवान शंकर को सिर नवाकर अपने-अपने स्थान को चले गये। | mahabharat अध्याय 13.167: पार्वतीजीके द्वारा स्त्री-धर्मका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीष्म कहते हैं - युधिष्ठिर! पार्वती के मुख से स्त्री के कर्तव्यों का वर्णन सुनकर देवाधिदेव महादेव ने गिरिराज की राजकुमारी का बहुत आदर किया और वहाँ अपने अनुयायियों सहित आये हुए सभी लोगों को वहाँ से चले जाने का आदेश दिया। तब सभी भूत, नदियाँ, गन्धर्व और अप्सराएँ भगवान शंकर को सिर नवाकर अपने-अपने स्थान को चले गये।
Bhishma says - Yudhishthira! After listening to Parvati's description of the duties of a woman, the lord of gods, Mahadev, greatly respected the princess of Giriraj and ordered all the people who had come there with their followers to leave. Then all the ghosts, rivers, Gandharvas and Apsaras bowed their heads to Lord Shankar and went to their respective places. 60-61.
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि उमामहेश्वरसंवादे स्त्रीधर्मकथने षट्चत्वारिंशदधिक शततमोऽध्याय:॥ १४६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें उमा-महेश्वरसंवादके प्रसङ्गमें स्त्रीधर्मका वर्णनविषयक एक सौ छियालिसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४६॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ३ श्लोक मिलाकर कुल ६४ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥