Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.167.53: जो स्त्री शीघ्र ही मर्यादा को समझने वाली बुद्धि के द्वारा प्रतिदिन कठिन व्रतों का पालन करती है, केवल अपने पति पर ही ध्यान केन्द्रित करती है तथा निरन्तर उसके कल्याण में लगी रहती है, उसे पतिव्रता स्त्री होने का सुख प्राप्त होता है। | mahabharat अध्याय 13.167: पार्वतीजीके द्वारा स्त्री-धर्मका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो स्त्री शीघ्र ही मर्यादा को समझने वाली बुद्धि के द्वारा प्रतिदिन कठिन व्रतों का पालन करती है, केवल अपने पति पर ही ध्यान केन्द्रित करती है तथा निरन्तर उसके कल्याण में लगी रहती है, उसे पतिव्रता स्त्री होने का सुख प्राप्त होता है।
She who daily performs difficult vows with the help of a mind that quickly comprehends the decorum, keeps her mind focused only on her husband, and is constantly engaged in his welfare, gets the happiness of observing the duty of being a devoted wife.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥