Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.167.27: गंगाजी बोलीं- देवी! धर्मात्मा! असभ्य! मैं धन्य हूँ। तुमने मुझ पर बड़ा उपकार किया है, क्योंकि सम्पूर्ण जगत में आदरणीय होते हुए भी तुम एक तुच्छ नदी को मान्यता दे रही हो॥ 27॥ | mahabharat अध्याय 13.167: पार्वतीजीके द्वारा स्त्री-धर्मका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गङ्गोवाच
धन्यास्म्यनुगृहीतास्मि देवि धर्मपरायणे।
या त्वं सर्वजगन्मान्या नदीं मानयसेऽनघे॥ २७॥
अनुवाद
गंगाजी बोलीं- देवी! धर्मात्मा! असभ्य! मैं धन्य हूँ। तुमने मुझ पर बड़ा उपकार किया है, क्योंकि सम्पूर्ण जगत में आदरणीय होते हुए भी तुम एक तुच्छ नदी को मान्यता दे रही हो॥ 27॥
Gangaji said- Goddess! Religious! Uncivilized! I am blessed. You have done me a great favour because despite being respected in the whole world, you are giving recognition to an insignificant river.॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥