श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 167: पार्वतीजीके द्वारा स्त्री-धर्मका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.167.1 
नारद उवाच
एवमुक्त्वा महादेव: श्रोतुकाम: स्वयं प्रभु:।
अनुकूलां प्रियां भार्यां पार्श्वस्थां समभाषत॥ १॥
 
 
अनुवाद
नारदजी कहते हैं - ऐसा कहकर महादेवजी ने भी पार्वतीजी के मुख से कुछ सुनने की इच्छा की। अतः भगवान शिव ने स्वयं अपनी प्रिय एवं कृपालु पत्नी पार्वतीजी से, जो पास में बैठी थीं, यह बात कही॥1॥
 
Naradji says - Having said this, Mahadevji himself also desired to hear something from Parvatiji's mouth. Therefore Lord Shiva himself said this to his beloved and favourable wife Parvati who was sitting nearby.॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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