Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.166.d8: मैं पूर्वकाल के साधकों के लिए भी अव्यक्त और अचिन्त्य रहा हूँ। मैंने ही सांख्य और योग की रचना की है। मैंने ही समस्त जड़-चेतन जगत की रचना की है।   |   mahabharat अध्याय 13.166: पाशुपत योगका वर्णन तथा शिवलिंग-पूजनका माहात्म्य]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 166: पाशुपत योगका वर्णन तथा शिवलिंग-पूजनका माहात्म्य]  »  श्लोक d8
 
 
श्लोक  13.166.d8 
अव्यक्तोऽहमचिन्त्योऽहं पूर्वैरपि मुमुक्षुभि:।
सांख्ययोगौ मया सृष्टौ सर्वं चापि चराचरम्॥
 
 
अनुवाद
मैं पूर्वकाल के साधकों के लिए भी अव्यक्त और अचिन्त्य रहा हूँ। मैंने ही सांख्य और योग की रचना की है। मैंने ही समस्त जड़-चेतन जगत की रचना की है।
 
I have remained unmanifested and unthinkable even to the earlier seekers. I am the one who created Sankhya and Yoga. I am the one who created the entire animate and inanimate world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)