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mahabharat 13.166.d7: श्री महेश्वर बोले - देवी! मैं प्रसन्नतापूर्वक तुमसे अपने उस अद्भुत सायुज्य का वर्णन करता हूँ, जिससे वे परम योगी पुनः संसार में नहीं लौटते।   |   mahabharat अध्याय 13.166: पाशुपत योगका वर्णन तथा शिवलिंग-पूजनका माहात्म्य]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 166: पाशुपत योगका वर्णन तथा शिवलिंग-पूजनका माहात्म्य]  »  श्लोक d7
 
 
श्लोक  13.166.d7 
श्रीमहेश्वर उवाच
हन्त ते कथयिष्यामि मम सायुज्यमद्भुतम्।
येन ते न निवर्तन्ते युक्ता: परमयोगिन:॥
 
 
अनुवाद
श्री महेश्वर बोले - देवी! मैं प्रसन्नतापूर्वक तुमसे अपने उस अद्भुत सायुज्य का वर्णन करता हूँ, जिससे वे परम योगी पुनः संसार में नहीं लौटते।
 
Shri Maheshwar said - Devi! I happily describe to you my wonderful Sayujya, by which those supreme Yogis do not return to the world again.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)