Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.166.d32-d34: इस प्रकार जो मनुष्य नाना प्रकार की द्रव्यों से शिवलिंग की पूजा करता है, वह मनुष्यों में मेरे समान है। वह इस संसार में पुनः जन्म नहीं लेता। अतः भक्त को चाहिए कि वह आलस्य त्यागकर प्रतिदिन शिवलिंग के रूप में मेरी पूजा, वंदना, दान और स्तुति करके करे। पलाश और बेल के पत्ते, राजवृक्ष के पुष्पों की माला और आक के पवित्र पुष्प मुझे विशेष प्रिय हैं। | mahabharat अध्याय 13.166: पाशुपत योगका वर्णन तथा शिवलिंग-पूजनका माहात्म्य] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं नानाविधैर्द्रव्यै: शिवलिङ्गं समर्चयेत्।
मत्समानो मनुष्येषु न पुनर्जायते नर:॥
अर्चनाभिर्नमस्कारैरुपहारै: स्तवैरपि।
भक्तो मामर्चयेन्नित्यं शिवलिङ्गेष्वतन्द्रित:॥
पलाशबिल्वपत्राणि राजवृक्षस्रजस्तथा।
अर्कपुष्पाणि मेध्यानि मत्प्रियाणि विशेषत:॥
अनुवाद
इस प्रकार जो मनुष्य नाना प्रकार की द्रव्यों से शिवलिंग की पूजा करता है, वह मनुष्यों में मेरे समान है। वह इस संसार में पुनः जन्म नहीं लेता। अतः भक्त को चाहिए कि वह आलस्य त्यागकर प्रतिदिन शिवलिंग के रूप में मेरी पूजा, वंदना, दान और स्तुति करके करे। पलाश और बेल के पत्ते, राजवृक्ष के पुष्पों की माला और आक के पवित्र पुष्प मुझे विशेष प्रिय हैं।
In this manner, he who worships Shivalinga with various kinds of material things is equal to me among men. He does not take birth in this world again. Therefore, a devotee should worship me in the form of Shivalinga by offering prayers, salutations, gifts and hymns every day, leaving aside his laziness. Leaves of Palaash and Bel, garlands of flowers of Rajvriksha and sacred flowers of Aak are especially dear to me.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥