Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.166.d21: इस प्रकार मेरे उन तपस्वी भक्तों के लिए, जो सदैव मेरे चिन्तन में लगे रहते हैं, मैं ऐसे उपाय का चिन्तन करता रहता हूँ, जिससे वे शीघ्र ही मेरे पास पहुँच जाएँ। | mahabharat अध्याय 13.166: पाशुपत योगका वर्णन तथा शिवलिंग-पूजनका माहात्म्य] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं नित्याभियुक्तानां मद्भक्तानां तपस्विनाम्।
उपायं चिन्तयाम्याशु येन मामुपयान्ति ते॥
अनुवाद
इस प्रकार मेरे उन तपस्वी भक्तों के लिए, जो सदैव मेरे चिन्तन में लगे रहते हैं, मैं ऐसे उपाय का चिन्तन करता रहता हूँ, जिससे वे शीघ्र ही मेरे पास पहुँच जाएँ।
In this way, for my ascetic devotees who are always engaged in thinking about me, I keep thinking of such a way by which they reach me very soon.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥