Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.166.d10-d12: देवता और तपस्वी ऋषिगण भी मुझे ठीक से नहीं जानते। देवि! आपकी प्रसन्नता के लिए मैं आपको अपनी शक्ति बता रहा हूँ। शुभ! देवि! मैंने चारों आश्रमों से चार धर्मनिष्ठ तपस्वी ब्राह्मणों को, जो मेरे भक्त और शुद्धचित्त थे, लाकर उन्हें उत्तम पाशुपत योग का उपदेश दिया। | mahabharat अध्याय 13.166: पाशुपत योगका वर्णन तथा शिवलिंग-पूजनका माहात्म्य] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
देवता और तपस्वी ऋषिगण भी मुझे ठीक से नहीं जानते। देवि! आपकी प्रसन्नता के लिए मैं आपको अपनी शक्ति बता रहा हूँ। शुभ! देवि! मैंने चारों आश्रमों से चार धर्मनिष्ठ तपस्वी ब्राह्मणों को, जो मेरे भक्त और शुद्धचित्त थे, लाकर उन्हें उत्तम पाशुपत योग का उपदेश दिया।
Even the gods and the ascetic sages do not know me well. Goddess! To please you, I am telling you about my power. Shubh! Goddess! I brought four pious ascetic Brahmins from the four ashrams, who were my devotees and of pure mind, and explained the great Pashupat Yoga to them.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥