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mahabharat 13.166.d1-d2: उमान ने पूछा - तीन नेत्रों वाले! त्रिदाश्रेष्ठ! देवेश्वर! त्र्यम्बक! त्रिपुर का नाश करने वाले और कामदेव के शरीर को नष्ट करने वाले गंगाधर! दक्षयज्ञ का विध्वंस करने वाले त्रिशूलधारी! शत्रुसूदन! लोकपालेश्वर, जो लोगों को भी वर देते हैं! आपको नमस्कार है।   |   mahabharat अध्याय 13.166: पाशुपत योगका वर्णन तथा शिवलिंग-पूजनका माहात्म्य]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.166.d1-d2 
उमोवाच
त्रियक्ष त्रिदशश्रेष्ठ त्र्यम्बक त्रिदशाधिप।
त्रिपुरान्तक कामाङ्गहर त्रिपथगाधर॥
दक्षयज्ञप्रमथन शूलपाणेऽरिसूदन।
नमस्ते लोकपालेश लोकपालवरप्रद॥
 
 
अनुवाद
उमान ने पूछा - तीन नेत्रों वाले! त्रिदाश्रेष्ठ! देवेश्वर! त्र्यम्बक! त्रिपुर का नाश करने वाले और कामदेव के शरीर को नष्ट करने वाले गंगाधर! दक्षयज्ञ का विध्वंस करने वाले त्रिशूलधारी! शत्रुसूदन! लोकपालेश्वर, जो लोगों को भी वर देते हैं! आपको नमस्कार है।
 
Uman asked – Three eyed! Tridaashrestha! Deveshwar! Trimbak! Gangadhar, the destroyer of Tripura and the destroyer of Kamadeva's body! The one wielding the trident who destroys Dakshayagya! Shatrusudan! Lokpaleshwar, who grants boons even to the people! Greetings to you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)