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mahabharat 13.164.d43-d44: मन को नियंत्रित करने वाले और सृष्टि के कारण भगवान (आत्मा) मन सहित सभी जीवों को सदैव विभिन्न कार्यों हेतु नियुक्त करते हैं। इन्द्रियाँ, इन्द्रियों के विषय, प्रकृति, चेतना, आसक्ति और भौतिक विकार - ये सभी मिलकर शरीर का निर्माण करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.164: सांख्यज्ञानका प्रतिपादन करते हुए अव्यक्तादि चौबीस तत्त्वोंकी उत्पत्ति आदिका वर्णन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.164.d43-d44 
नियुङ्‍‍क्ते च सदा तानि भूतानि मनसा सह।
नियमे च विसर्गे च मनस: कारणं प्रभु:॥
इन्द्रियाणीन्द्रियार्थाश्च स्वभावश्चेतना धृति:।
भूताभूतविकारश्च शरीरमिति संस्थितम्॥
 
 
अनुवाद
मन को नियंत्रित करने वाले और सृष्टि के कारण भगवान (आत्मा) मन सहित सभी जीवों को सदैव विभिन्न कार्यों हेतु नियुक्त करते हैं। इन्द्रियाँ, इन्द्रियों के विषय, प्रकृति, चेतना, आसक्ति और भौतिक विकार - ये सभी मिलकर शरीर का निर्माण करते हैं।
 
The Lord (Soul) who controls the mind and is the cause of creation, always appoints all the living beings including the mind for various tasks. The senses, the objects of the senses, nature, consciousness, attachment and material disorders—all these together constitute the body.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)