Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.164.d37: वायु प्राण और अपान का निवास स्थान है। प्राणियों के शरीर के सभी रोमछिद्र आकाश से भरे हुए हैं। बाल, हड्डियाँ, नाखून, दाँत, त्वचा, हाथ, पैर, सिर, पीठ, पेट, कमर और गर्दन - ये सभी पृथ्वी के कार्य माने गए हैं। | mahabharat अध्याय 13.164: सांख्यज्ञानका प्रतिपादन करते हुए अव्यक्तादि चौबीस तत्त्वोंकी उत्पत्ति आदिका वर्णन] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वायु प्राण और अपान का निवास स्थान है। प्राणियों के शरीर के सभी रोमछिद्र आकाश से भरे हुए हैं। बाल, हड्डियाँ, नाखून, दाँत, त्वचा, हाथ, पैर, सिर, पीठ, पेट, कमर और गर्दन - ये सभी पृथ्वी के कार्य माने गए हैं।
Air is the abode of Prana and Apana. All the pores in the body of living beings are filled with space. Hair, bones, nails, teeth, skin, hands, feet, head, back, stomach, waist and neck – all these are considered to be the functions of the earth.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥