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mahabharat 13.164.d34-d35: उत्तरवर्ती भूतकाल पूर्व के भूतकाल के गुणों को प्राप्त कर लेते हैं। इसीलिए यहाँ जीवों की सृष्टि अनेक गुणों से युक्त प्रतीत होती है। कमलेक्षणे! विद्वान पुरुष इस बात को स्वीकार नहीं करते कि कुछ अयोग्य लोग जल में सुगंध या दुर्गन्ध पाकर उस गंध को जल का गुण घोषित कर देते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.164: सांख्यज्ञानका प्रतिपादन करते हुए अव्यक्तादि चौबीस तत्त्वोंकी उत्पत्ति आदिका वर्णन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.164.d34-d35 
गुणान् पूर्वस्य पूर्वस्य प्राप्नुवन्त्युत्तराणि तु।
तस्मान्नैकगुणाश्चेह दृश्यन्ते भूतसृष्टय:॥
उपलभ्याप्सु ये गन्धं केचिद् ब्रूयुरनैपुणा:।
अपां गन्धगुणं प्राज्ञा नेच्छन्ति कमलेक्षणे॥
 
 
अनुवाद
उत्तरवर्ती भूतकाल पूर्व के भूतकाल के गुणों को प्राप्त कर लेते हैं। इसीलिए यहाँ जीवों की सृष्टि अनेक गुणों से युक्त प्रतीत होती है। कमलेक्षणे! विद्वान पुरुष इस बात को स्वीकार नहीं करते कि कुछ अयोग्य लोग जल में सुगंध या दुर्गन्ध पाकर उस गंध को जल का गुण घोषित कर देते हैं।
 
Successive pasts acquire the qualities of earlier pasts. That is why the creation of living beings here appears to be endowed with many qualities. Kamalekshane! Learned men do not accept the fact that some unworthy people, after finding fragrance or foul smell in water, declare the smell to be a quality of water.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)