Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.164.d12: वह अव्यक्त सत्ता अवर्णनीय है क्योंकि वह अत्यंत सूक्ष्म है - उसे शब्दों से व्यक्त नहीं किया जा सकता। उसे 'सत्' कहते हैं। वह समस्त ब्रह्माण्ड का मूल है और उसे सृष्टि का मूल भी कहा गया है। | mahabharat अध्याय 13.164: सांख्यज्ञानका प्रतिपादन करते हुए अव्यक्तादि चौबीस तत्त्वोंकी उत्पत्ति आदिका वर्णन] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत् सूक्ष्मत्वादनिर्देश्यं तत् सदित्यभिधीयते।
तन्मूलं च जगत् सर्वं तन्मूला सृष्टिरिष्यते॥
अनुवाद
वह अव्यक्त सत्ता अवर्णनीय है क्योंकि वह अत्यंत सूक्ष्म है - उसे शब्दों से व्यक्त नहीं किया जा सकता। उसे 'सत्' कहते हैं। वह समस्त ब्रह्माण्ड का मूल है और उसे सृष्टि का मूल भी कहा गया है।
That unmanifested being is indescribable because it is extremely subtle - it cannot be indicated by words. It is called 'Sat'. It is the origin of the entire universe and it is also said to be the origin of creation.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥