Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.163.d75: विद्वान पुरुष को सदैव सावधान रहना चाहिए और अपनी इन्द्रियों की रक्षा करनी चाहिए, क्योंकि यदि इनकी रक्षा न की जाए तो मनुष्य शीघ्र ही नरक में गिर जाता है। | mahabharat अध्याय 13.163: मोक्षधर्मकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन, मोक्षसाधक ज्ञानकी प्राप्तिका उपाय और मोक्षकी प्राप्तिमें वैराग्यकी प्रधानता] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अप्रमत्त: सदा रक्षेदिन्द्रियाणि विचक्षण:।
अरक्षितेषु तेष्वाशु नरो नरकमेति हि॥
अनुवाद
विद्वान पुरुष को सदैव सावधान रहना चाहिए और अपनी इन्द्रियों की रक्षा करनी चाहिए, क्योंकि यदि इनकी रक्षा न की जाए तो मनुष्य शीघ्र ही नरक में गिर जाता है।
A learned man should always be cautious and protect his senses, because if they are not protected, a man soon falls into hell.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥