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mahabharat 13.163.d3: श्री महेश्वर बोले- हे महात्मन! तुमने निष्पक्ष होकर बात सुनने की दृढ़ इच्छा प्रकट की है, प्रिये! तुम मुझसे जो पूछ रही हो, वह तुम्हारा विशेष गुण है।   |   mahabharat अध्याय 13.163: मोक्षधर्मकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन, मोक्षसाधक ज्ञानकी प्राप्तिका उपाय और मोक्षकी प्राप्तिमें वैराग्यकी प्रधानता]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.163.d3 
श्रीमहेश्वर उवाच
न्यायतस्त्वं महाभागे श्रोतुकामासि निश्चयम्।
एतदेव विशिष्टं ते यत् त्वं पृच्छसि मां प्रिये॥
 
 
अनुवाद
श्री महेश्वर बोले- हे महात्मन! तुमने निष्पक्ष होकर बात सुनने की दृढ़ इच्छा प्रकट की है, प्रिये! तुम मुझसे जो पूछ रही हो, वह तुम्हारा विशेष गुण है।
 
Shri Maheshwar said- O great one! You have expressed a firm desire to hear the matter fairly, my love! What you are asking me is your special quality.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)