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mahabharat 13.163.d29: ब्रह्मचर्य, वनवास, पवित्रता, आत्मसंयम और सभी प्राणियों पर दया - यही संन्यासी का सनातन धर्म है।   |   mahabharat अध्याय 13.163: मोक्षधर्मकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन, मोक्षसाधक ज्ञानकी प्राप्तिका उपाय और मोक्षकी प्राप्तिमें वैराग्यकी प्रधानता]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.163.d29 
ब्रह्मचर्यं वने वास: शौचमिन्द्रियसंयम:।
दया च सर्वभूतेषु तस्य धर्म: सनातन:॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मचर्य, वनवास, पवित्रता, आत्मसंयम और सभी प्राणियों पर दया - यही संन्यासी का सनातन धर्म है।
 
Celibacy, exile, purity, self-control and kindness to all creatures - this is the eternal religion of a Sanyasi.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)