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mahabharat 13.163.d105: जब मनुष्य एक ही दिन में सबको छोड़कर मृत्यु की ओर चला जाता है, तो उसकी पत्नी, पुत्र और प्रिय सुखों का क्या उपयोग है?   |   mahabharat अध्याय 13.163: मोक्षधर्मकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन, मोक्षसाधक ज्ञानकी प्राप्तिका उपाय और मोक्षकी प्राप्तिमें वैराग्यकी प्रधानता]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.163.d105 
मर्त्यस्य किमु तैर्दारै: पुत्रैर्भोगै: प्रियैरपि।
एकाह्ना सर्वमुत्सृज्य मृत्योस्तु वशमन्वियात्॥
 
 
अनुवाद
जब मनुष्य एक ही दिन में सबको छोड़कर मृत्यु की ओर चला जाता है, तो उसकी पत्नी, पुत्र और प्रिय सुखों का क्या उपयोग है?
 
What is the use of a man's wife, sons and favourite pleasures, when he leaves them all and goes towards death in a single day?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)