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mahabharat 13.161.d9: विद्वान पुरुष को प्रातःकाल, शुक्ल पक्ष में, रात्रि में, जन्म के दिन तथा दोनों दिनों में श्राद्ध नहीं करना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 13.161: श्राद्धविधान आदिका वर्णन, दानकी त्रिविधतासे उसके फलकी भी त्रिविधताका उल्लेख, दानके पाँच फल, नाना प्रकारके धर्म और उनके फलोंका प्रतिपादन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 161: श्राद्धविधान आदिका वर्णन, दानकी त्रिविधतासे उसके फलकी भी त्रिविधताका उल्लेख, दानके पाँच फल, नाना प्रकारके धर्म और उनके फलोंका प्रतिपादन]  »  श्लोक d9
 
 
श्लोक  13.161.d9 
पूर्वाह्णे शुक्लपक्षे च रात्रौ जन्मदिनेषु वा।
युग्मेष्वहस्सु च श्राद्धं न च कुर्वीत पण्डित:॥
 
 
अनुवाद
विद्वान पुरुष को प्रातःकाल, शुक्ल पक्ष में, रात्रि में, जन्म के दिन तथा दोनों दिनों में श्राद्ध नहीं करना चाहिए।
 
A learned man should not perform Shraddha in the morning, in the Shukla paksha, at night, on the day of his birth and on the pair of days.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)