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mahabharat 13.161.d8: अमावस्या, त्रयोदशी, नवमी और प्रतिपदा इन तिथियों पर श्राद्ध करने से पितर संतुष्ट होते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.161: श्राद्धविधान आदिका वर्णन, दानकी त्रिविधतासे उसके फलकी भी त्रिविधताका उल्लेख, दानके पाँच फल, नाना प्रकारके धर्म और उनके फलोंका प्रतिपादन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 161: श्राद्धविधान आदिका वर्णन, दानकी त्रिविधतासे उसके फलकी भी त्रिविधताका उल्लेख, दानके पाँच फल, नाना प्रकारके धर्म और उनके फलोंका प्रतिपादन]  »  श्लोक d8
 
 
श्लोक  13.161.d8 
अमावास्यां त्रयोदश्यां नवम्यां प्रतिपत्सु च।
तिथिष्वेतासु तुष्यन्ति दत्तेनेह पितामहा:॥
 
 
अनुवाद
अमावस्या, त्रयोदशी, नवमी और प्रतिपदा इन तिथियों पर श्राद्ध करने से पितर संतुष्ट होते हैं।
 
The ancestors are satisfied by offering Shraddha on these dates - Amavasya, Trayodashi, Navami and Pratipada.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)