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mahabharat 13.161.d61: धर्मों में श्रौत (वेदों द्वारा वर्णित) और स्मार्त (स्मृति द्वारा वर्णित) धर्मों को प्राकृत धर्म कहते हैं। देवि! इस प्रकार तुम्हें धर्म के बारे में बताया गया है। अब तुम और क्या सुनना चाहती हो?   |   mahabharat अध्याय 13.161: श्राद्धविधान आदिका वर्णन, दानकी त्रिविधतासे उसके फलकी भी त्रिविधताका उल्लेख, दानके पाँच फल, नाना प्रकारके धर्म और उनके फलोंका प्रतिपादन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.161.d61 
श्रौतस्मार्तस्तु धर्माणां प्रकृतो धर्म उच्यते।
इति ते कथितं देवि भूय: श्रोतुं किमिच्छसि॥
 
 
अनुवाद
धर्मों में श्रौत (वेदों द्वारा वर्णित) और स्मार्त (स्मृति द्वारा वर्णित) धर्मों को प्राकृत धर्म कहते हैं। देवि! इस प्रकार तुम्हें धर्म के बारे में बताया गया है। अब तुम और क्या सुनना चाहती हो?
 
Among the religions, the Shrauta (told by Vedas) and Smarta (told by Smriti) religions are called Prakrit Dharma. Devi! In this way, you have been told about the religion. What else do you want to hear?
 
(दाक्षिणात्य प्रतिमें अध्याय समाप्त)


 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)