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mahabharat 13.161.d60: जब कारण और प्रभाव संयुक्त होते हैं, तो धर्म करने वाले व्यक्ति को उस धर्म का फल प्राप्त होता है।   |   mahabharat अध्याय 13.161: श्राद्धविधान आदिका वर्णन, दानकी त्रिविधतासे उसके फलकी भी त्रिविधताका उल्लेख, दानके पाँच फल, नाना प्रकारके धर्म और उनके फलोंका प्रतिपादन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 161: श्राद्धविधान आदिका वर्णन, दानकी त्रिविधतासे उसके फलकी भी त्रिविधताका उल्लेख, दानके पाँच फल, नाना प्रकारके धर्म और उनके फलोंका प्रतिपादन]  »  श्लोक d60
 
 
श्लोक  13.161.d60 
तत्कारणसमायोगे लभेत् कुर्वन् फलं नर:॥
 
 
अनुवाद
जब कारण और प्रभाव संयुक्त होते हैं, तो धर्म करने वाले व्यक्ति को उस धर्म का फल प्राप्त होता है।
 
When the cause and effect are combined, the person performing Dharma receives the fruits of that Dharma.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)