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mahabharat 13.161.d6: तीर्थस्थान, पवित्र नदियाँ, निर्जन वन और नदी तट श्राद्ध के लिए स्तुति योग्य स्थान हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.161: श्राद्धविधान आदिका वर्णन, दानकी त्रिविधतासे उसके फलकी भी त्रिविधताका उल्लेख, दानके पाँच फल, नाना प्रकारके धर्म और उनके फलोंका प्रतिपादन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.161.d6 
तीर्थानि सरित: पुण्या विविक्तानि वनानि च।
नदीनां पुलिनानीति देशा: श्राद्धस्य पूजिता:॥
 
 
अनुवाद
तीर्थस्थान, पवित्र नदियाँ, निर्जन वन और नदी तट श्राद्ध के लिए स्तुति योग्य स्थान हैं।
 
Places of pilgrimage, holy rivers, secluded forests and river banks are the places praised for performing Shraddha.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)