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mahabharat 13.161.d45: सामदान मानव लोक के भोगों को प्रस्तुत करता है। शुभ हो! कर्म के बिना किया गया दान निष्फल कहा गया है।   |   mahabharat अध्याय 13.161: श्राद्धविधान आदिका वर्णन, दानकी त्रिविधतासे उसके फलकी भी त्रिविधताका उल्लेख, दानके पाँच फल, नाना प्रकारके धर्म और उनके फलोंका प्रतिपादन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.161.d45 
समस्य तु तदा दानं मानुष्यं भोगमावहेत्।
दानं निष्फलमित्याहुर्विहीनं क्रियया शुभे॥
 
 
अनुवाद
सामदान मानव लोक के भोगों को प्रस्तुत करता है। शुभ हो! कर्म के बिना किया गया दान निष्फल कहा गया है।
 
Sam-daan presents the enjoyment of the human world. Good luck! Donation without action is said to be fruitless.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)