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mahabharat 13.161.d44: अनंत्य या 'अनंत' नामक दान का फल स्वर्ग में दीर्घकाल तक भोगा जाता है। महाद दान का फल यह है कि मनुष्य स्वर्ग में दीर्घकाल तक पूजित होता है।   |   mahabharat अध्याय 13.161: श्राद्धविधान आदिका वर्णन, दानकी त्रिविधतासे उसके फलकी भी त्रिविधताका उल्लेख, दानके पाँच फल, नाना प्रकारके धर्म और उनके फलोंका प्रतिपादन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.161.d44 
देवलोके महत् कालमानन्त्यस्य फलं विदु:।
महतस्तु तथा कालं स्वर्गलोके तु पूज्यते॥
 
 
अनुवाद
अनंत्य या 'अनंत' नामक दान का फल स्वर्ग में दीर्घकाल तक भोगा जाता है। महाद दान का फल यह है कि मनुष्य स्वर्ग में दीर्घकाल तक पूजित होता है।
 
The fruit of the donation called Anantya or 'Ananta' is enjoyed for a long time in the heaven. The fruit of the Mahad donation is that the man is worshipped for a long time in heaven.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)