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mahabharat 13.161.d42: जो दान उपर्युक्त छः गुणों से युक्त हो, उसे महान् कहते हैं। अपनी श्रद्धा के अनुसार दान देना 'साम' कहलाता है।   |   mahabharat अध्याय 13.161: श्राद्धविधान आदिका वर्णन, दानकी त्रिविधतासे उसके फलकी भी त्रिविधताका उल्लेख, दानके पाँच फल, नाना प्रकारके धर्म और उनके फलोंका प्रतिपादन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 161: श्राद्धविधान आदिका वर्णन, दानकी त्रिविधतासे उसके फलकी भी त्रिविधताका उल्लेख, दानके पाँच फल, नाना प्रकारके धर्म और उनके फलोंका प्रतिपादन]  »  श्लोक d42
 
 
श्लोक  13.161.d42 
दानं षड्गुणयुक्तं तु महदित्यभिधीयते।
यथाश्रद्धं तु वै दानं यथार्हं सममुच्यते॥
 
 
अनुवाद
जो दान उपर्युक्त छः गुणों से युक्त हो, उसे महान् कहते हैं। अपनी श्रद्धा के अनुसार दान देना 'साम' कहलाता है।
 
The donation which is imbued with the above mentioned six qualities is called 'Mahan'. Giving donation as per one's faith is called 'Sama'.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)