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शृणु दत्तस्य वै देवि पञ्चधा फलकल्पनाम्।
आनन्त्यं च महच्चैव समं हीनं हि पातकम्॥
अनुवाद
देवि! दान का फल पाँच प्रकार से कल्पित किया गया है, उसे सुनो। फल पाँच प्रकार के हैं - अनंत, महान, सम, अश्रेष्ठ और पाप।
Devi! The fruits of charity have been imagined in five ways, listen to them. There are five kinds of fruits - infinite, great, equal, inferior and sinful.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥