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mahabharat 13.161.d39: यदि धर्म, अर्थ और विषय-सुख में बल की कमी हो और उस स्थिति में कुछ दान किया जाए तो वह दान मध्यम श्रेणी का होता है और धन और बल के अनुसार बहुत कम श्रेणी का दान निकृष्ट माना जाता है।   |   mahabharat अध्याय 13.161: श्राद्धविधान आदिका वर्णन, दानकी त्रिविधतासे उसके फलकी भी त्रिविधताका उल्लेख, दानके पाँच फल, नाना प्रकारके धर्म और उनके फलोंका प्रतिपादन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 161: श्राद्धविधान आदिका वर्णन, दानकी त्रिविधतासे उसके फलकी भी त्रिविधताका उल्लेख, दानके पाँच फल, नाना प्रकारके धर्म और उनके फलोंका प्रतिपादन]  »  श्लोक d39
 
 
श्लोक  13.161.d39 
धर्मार्थकामभोगेषु शक्त्यभावस्तु मध्यमम्।
स्वद्रव्यादतिहीनं तु तद् दानमधमं स्मृतम्॥
 
 
अनुवाद
यदि धर्म, अर्थ और विषय-सुख में बल की कमी हो और उस स्थिति में कुछ दान किया जाए तो वह दान मध्यम श्रेणी का होता है और धन और बल के अनुसार बहुत कम श्रेणी का दान निकृष्ट माना जाता है।
 
If there is lack of strength in Dharma, Artha and sensual pleasures and in that condition some donation is made then that donation is of medium category and donation of very less category as per one's wealth and strength is considered to be inferior.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)