Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.161.d37-d38: एक गरीब का सार एक किलो अनाज होता है और एक करोड़पति का सार करोड़ों होता है। जिसका सार एक किलो अनाज है, वह उसे दान करके महान फल प्राप्त करता है और जिसका सार एक करोड़ सिक्के हैं, वह उसे दान करके महान फल प्राप्त करता है। ये दोनों ही दान महत्वपूर्ण हैं और दोनों का फल महान माना जाता है। | mahabharat अध्याय 13.161: श्राद्धविधान आदिका वर्णन, दानकी त्रिविधतासे उसके फलकी भी त्रिविधताका उल्लेख, दानके पाँच फल, नाना प्रकारके धर्म और उनके फलोंका प्रतिपादन] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एक गरीब का सार एक किलो अनाज होता है और एक करोड़पति का सार करोड़ों होता है। जिसका सार एक किलो अनाज है, वह उसे दान करके महान फल प्राप्त करता है और जिसका सार एक करोड़ सिक्के हैं, वह उसे दान करके महान फल प्राप्त करता है। ये दोनों ही दान महत्वपूर्ण हैं और दोनों का फल महान माना जाता है।
The essence of a poor person is a kilo of grain and the essence of a millionaire is crores. The one whose essence is a kilo of grain, by donating that, he gets great rewards and the one whose essence is a crore of coins, if he donates that, he gets great rewards. Both these donations are important and the result of both is considered to be great.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥