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mahabharat 13.161.d33: जो पंडित लोग पोषण की इच्छा रखते हैं और श्राद्ध करते हैं, उन्हें पितर सदैव पोषण और संतान प्रदान करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.161: श्राद्धविधान आदिका वर्णन, दानकी त्रिविधतासे उसके फलकी भी त्रिविधताका उल्लेख, दानके पाँच फल, नाना प्रकारके धर्म और उनके फलोंका प्रतिपादन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 161: श्राद्धविधान आदिका वर्णन, दानकी त्रिविधतासे उसके फलकी भी त्रिविधताका उल्लेख, दानके पाँच फल, नाना प्रकारके धर्म और उनके फलोंका प्रतिपादन]  »  श्लोक d33
 
 
श्लोक  13.161.d33 
श्राद्धानि पुष्टिकामा वै ये प्रकुर्वन्ति पण्डिता:।
तेषां पुष्टिं प्रजां चैव दास्यन्ति पितर: सदा॥
 
 
अनुवाद
जो पंडित लोग पोषण की इच्छा रखते हैं और श्राद्ध करते हैं, उन्हें पितर सदैव पोषण और संतान प्रदान करते हैं।
 
The ancestors always provide nourishment and children to those Pandits who desire nourishment and perform Shraddha.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)