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mahabharat 13.161.d31: श्राद्ध करने से मनुष्य दीर्घायु और स्वस्थ होता है, उसे अनेक पुत्र, सेवक और धन की प्राप्ति होती है।   |   mahabharat अध्याय 13.161: श्राद्धविधान आदिका वर्णन, दानकी त्रिविधतासे उसके फलकी भी त्रिविधताका उल्लेख, दानके पाँच फल, नाना प्रकारके धर्म और उनके फलोंका प्रतिपादन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 161: श्राद्धविधान आदिका वर्णन, दानकी त्रिविधतासे उसके फलकी भी त्रिविधताका उल्लेख, दानके पाँच फल, नाना प्रकारके धर्म और उनके फलोंका प्रतिपादन]  »  श्लोक d31
 
 
श्लोक  13.161.d31 
दीर्घायुश्च भवेत् स्वस्थ: पितृमेधेन वा पुन:।
सपुत्रो बहुभृत्यश्च प्रभूतधनधान्यवान्॥
 
 
अनुवाद
श्राद्ध करने से मनुष्य दीर्घायु और स्वस्थ होता है, उसे अनेक पुत्र, सेवक और धन की प्राप्ति होती है।
 
By performing Shraddha a person becomes long-lived and healthy. He is blessed with many sons, servants and wealth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)