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mahabharat 13.161.d29: इस सनातन पितृयज्ञ का संक्षेप में वर्णन किया गया। इससे पितर तृप्त होते हैं और श्राद्धकर्ता को शुभ फल प्राप्त होता है।   |   mahabharat अध्याय 13.161: श्राद्धविधान आदिका वर्णन, दानकी त्रिविधतासे उसके फलकी भी त्रिविधताका उल्लेख, दानके पाँच फल, नाना प्रकारके धर्म और उनके फलोंका प्रतिपादन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 161: श्राद्धविधान आदिका वर्णन, दानकी त्रिविधतासे उसके फलकी भी त्रिविधताका उल्लेख, दानके पाँच फल, नाना प्रकारके धर्म और उनके फलोंका प्रतिपादन]  »  श्लोक d29
 
 
श्लोक  13.161.d29 
एष प्रोक्त: समासेन पितृयज्ञ: सनातन:।
पितरस्तेन तुष्यन्ति कर्ता च फलमाप्नुयात्॥
 
 
अनुवाद
इस सनातन पितृयज्ञ का संक्षेप में वर्णन किया गया। इससे पितर तृप्त होते हैं और श्राद्धकर्ता को शुभ फल प्राप्त होता है।
 
This Sanatan Pitriyagya was briefly described. With this the ancestors are satisfied and the Shraddha performer gets good results.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)