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mahabharat 13.161.d26: पिंडदान की रस्म पूरी होने के बाद इन पिंडों को ब्राह्मण, अग्नि, बकरी या गाय द्वारा भस्म कर देना चाहिए या इन्हें जल में विसर्जित कर देना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 13.161: श्राद्धविधान आदिका वर्णन, दानकी त्रिविधतासे उसके फलकी भी त्रिविधताका उल्लेख, दानके पाँच फल, नाना प्रकारके धर्म और उनके फलोंका प्रतिपादन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.161.d26 
ततो निर्वपने वृत्ते तान् पिण्डांस्तदनन्तरम्।
ब्राह्मणोऽग्निरजो गौर्वा भक्षयेदप्सु वा क्षिपेत्॥
 
 
अनुवाद
पिंडदान की रस्म पूरी होने के बाद इन पिंडों को ब्राह्मण, अग्नि, बकरी या गाय द्वारा भस्म कर देना चाहिए या इन्हें जल में विसर्जित कर देना चाहिए।
 
After the ritual of Pind Daan is completed, these Pindas should be consumed by a Brahmin, fire, goat or a cow, or they should be immersed in water.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)