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mahabharat 13.161.d14: श्राद्ध में तीन चीज़ें पवित्र मानी जाती हैं- पौत्र, कुतपकाल (दिन के पंद्रह भागों का आठवाँ भाग) और तिल। इस कर्म में तीन गुणों की स्तुति की जाती है: पवित्रता, क्रोध का अभाव और एतवार (जल्दबाज़ी न करना)।   |   mahabharat अध्याय 13.161: श्राद्धविधान आदिका वर्णन, दानकी त्रिविधतासे उसके फलकी भी त्रिविधताका उल्लेख, दानके पाँच फल, नाना प्रकारके धर्म और उनके फलोंका प्रतिपादन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.161.d14 
त्रीणि श्राद्धे पवित्राणि दौहित्र: कुतपस्तिला:।
त्रीणि चात्र प्रशंसन्ति शौचमक्रोधमत्वराम्॥
 
 
अनुवाद
श्राद्ध में तीन चीज़ें पवित्र मानी जाती हैं- पौत्र, कुतपकाल (दिन के पंद्रह भागों का आठवाँ भाग) और तिल। इस कर्म में तीन गुणों की स्तुति की जाती है: पवित्रता, क्रोध का अभाव और एतवार (जल्दबाज़ी न करना)।
 
Three things are sacred in Shraddha- grandson, Kutapakaala (one eighth of the fifteen parts of the day) and sesame seeds. Three qualities are praised in this work. Purity, absence of anger and atvara (not being in a hurry).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)