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mahabharat 13.161.d12: शुभ कामनाएँ! ऐसे श्रोत्रिय ब्राह्मणों को श्राद्ध के योग्य समझना चाहिए जो सदाचारी, शास्त्रज्ञ और उत्तम कुल से युक्त हों, जिनकी पत्नियाँ उत्तम हों और जो सदाचारी हों। श्राद्ध में ब्राह्मणों की संख्या विषम होनी चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 13.161: श्राद्धविधान आदिका वर्णन, दानकी त्रिविधतासे उसके फलकी भी त्रिविधताका उल्लेख, दानके पाँच फल, नाना प्रकारके धर्म और उनके फलोंका प्रतिपादन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.161.d12 
वृत्तश्रुतकुलोपेतान् सकलत्रान् गुणान्वितान्।
तदर्हान् श्रोत्रियान् विद्धि ब्राह्मणानयुज: शुभे॥
 
 
अनुवाद
शुभ कामनाएँ! ऐसे श्रोत्रिय ब्राह्मणों को श्राद्ध के योग्य समझना चाहिए जो सदाचारी, शास्त्रज्ञ और उत्तम कुल से युक्त हों, जिनकी पत्नियाँ उत्तम हों और जो सदाचारी हों। श्राद्ध में ब्राह्मणों की संख्या विषम होनी चाहिए।
 
Good luck! You should consider such Shrotriya Brahmins who are full of good conduct, knowledge of scriptures and good family, have good wives and are virtuous, worthy of Shraddha. The number of Brahmins in Shraddha should be odd.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)