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mahabharat 13.161.d11: श्राद्ध में निम्न श्रेणी के ब्राह्मणों का त्याग करके कुल-शुद्ध ब्राह्मणों को ग्रहण करना चाहिए। यदि कोई श्राद्ध में पापियों को भोजन कराता है, तो वह नरक में जाता है।   |   mahabharat अध्याय 13.161: श्राद्धविधान आदिका वर्णन, दानकी त्रिविधतासे उसके फलकी भी त्रिविधताका उल्लेख, दानके पाँच फल, नाना प्रकारके धर्म और उनके फलोंका प्रतिपादन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.161.d11 
अपाङ्‍‍क्तेया द्विजा वर्ज्या ग्राह्यास्ते पङ्क्तिपावना:।
भोजयेद् यदि पापिष्ठान् श्राद्धेषु नरकं व्रजेत्॥
 
 
अनुवाद
श्राद्ध में निम्न श्रेणी के ब्राह्मणों का त्याग करके कुल-शुद्ध ब्राह्मणों को ग्रहण करना चाहिए। यदि कोई श्राद्ध में पापियों को भोजन कराता है, तो वह नरक में जाता है।
 
In Shraddha, non-ranking Brahmins should be sacrificed and line-pure Brahmins should be accepted. If someone serves food to sinners during Shraddha, he goes to hell.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)