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mahabharat 13.161.d10: मैंने तुम्हें श्राद्ध करने का यह शुभ समय बताया है। जिस दिन तुम्हें कोई योग्य ब्राह्मण मिले, वह दिन भी श्राद्ध करने के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।   |   mahabharat अध्याय 13.161: श्राद्धविधान आदिका वर्णन, दानकी त्रिविधतासे उसके फलकी भी त्रिविधताका उल्लेख, दानके पाँच फल, नाना प्रकारके धर्म और उनके फलोंका प्रतिपादन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.161.d10 
एष कालो मया प्रोक्त: पितृमेधस्य पूजित:।
यस्मिंश्च ब्राह्मणं पात्रं पश्येत् काल: स च स्मृत:॥
 
 
अनुवाद
मैंने तुम्हें श्राद्ध करने का यह शुभ समय बताया है। जिस दिन तुम्हें कोई योग्य ब्राह्मण मिले, वह दिन भी श्राद्ध करने के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
 
I have told you this auspicious time for performing Shraddha. The day when you meet a deserving Brahmin is also considered to be the best time for performing Shraddha.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)