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श्लोक  13.161.d1 
उमोवाच
पितृमेध: कथं देव तन्मे शंसितुमर्हसि।
सर्वेषां पितर: पूज्या: सर्वसम्पत्प्रदायिन:॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने पूछा - हे प्रभु! पितृमेध (श्राद्ध) कैसे किया जाता है? कृपया मुझे यह बताइए। जो पितर समस्त धन-संपत्ति के दाता हैं, वे सभी के लिए पूजनीय हैं।
 
He asked - O Lord! How is Pitrimedha (Shraddha) performed? Please tell me this. The ancestors who are the giver of all the wealth are worshipable for everyone.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)