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mahabharat 13.16.5: अब तुम मुझसे अपनी इच्छानुसार आठ वर मांगो। मैं तुम्हें वे वर प्रदान करूँगा। हे पाण्डुपुत्र! तब मैंने जगदम्बा के चरणों में सिर नवाकर उनसे कहा -॥5॥   |   mahabharat अध्याय 13.16: शिव और पार्वतीका श्रीकृष्णको वरदान और उपमन्युके द्वारा महादेवजीकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 16: शिव और पार्वतीका श्रीकृष्णको वरदान और उपमन्युके द्वारा महादेवजीकी महिमा  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  13.16.5 
मत्तोऽप्यष्टौ वरानिष्टान् गृहाण त्वं ददामि ते।
प्रणम्य शिरसा सा च मयोक्ता पाण्डुनन्दन॥ ५॥
 
 
अनुवाद
अब तुम मुझसे अपनी इच्छानुसार आठ वर मांगो। मैं तुम्हें वे वर प्रदान करूँगा। हे पाण्डुपुत्र! तब मैंने जगदम्बा के चरणों में सिर नवाकर उनसे कहा -॥5॥
 
Now ask me for the eight boons you desire. I shall grant you those boons.' O son of Pandu! Then I bowed my head at the feet of Jagadamba and said to her -॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)