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mahabharat 13.16.1: श्रीकृष्ण कहते हैं- हे भारत! तत्पश्चात मैंने मन को वश में करके तेजोराशि में स्थित महादेवजी को मस्तक नवाकर महान हर्ष से भरकर भगवान शिव से कहा- ॥1॥   |   mahabharat अध्याय 13.16: शिव और पार्वतीका श्रीकृष्णको वरदान और उपमन्युके द्वारा महादेवजीकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 16: शिव और पार्वतीका श्रीकृष्णको वरदान और उपमन्युके द्वारा महादेवजीकी महिमा  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.16.1 
श्रीकृष्ण उवाच
मूर्ध्ना निपत्य नियतस्तेज: संनिचये तत:।
परमं हर्षमागत्य भगवन्तमथाब्रुवम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण कहते हैं- हे भारत! तत्पश्चात मैंने मन को वश में करके तेजोराशि में स्थित महादेवजी को मस्तक नवाकर महान हर्ष से भरकर भगवान शिव से कहा- ॥1॥
 
Shri Krishna says-India! After that, after controlling my mind and bowing my head to Mahadevji situated in Tejorashi, I filled with great joy and said to Lord Shiva - ॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)