श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 159: यमलोक तथा वहाँके मार्गोंका वर्णन, पापियोंकी नरकयातनाओं तथा कर्मानुसार विभिन्न योनियोंमें उनके जन्मका उल्लेख]  »  श्लोक d70
 
 
श्लोक  13.159.d70 
द्वितीये द्विगुणं कालं पच्यन्ते तादृशा नरा:।
महापातकयुक्तास्तु तृतीये दु:खमाप्नुयु:॥
 
 
अनुवाद
दूसरे नरक (महारौरव) में पापी लोग दुगुने समय (दो लाख वर्ष) तक यातनाएँ झेलते हैं। तीसरे (कण्टकवन) में महापापी लोग कष्ट भोगते हैं।
 
In the second hell (Maharaurav) - the sinful people are tortured for double the time (two lakh years). In the third (Kantakavan) - the great sinful people suffer.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)