Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.156.d83-d88: श्री महेश्वर बोले - देवी! जो लोग प्रतिदिन घूस लेते हैं, दूसरों को डराते हैं और अपने मन में विकार उत्पन्न करते हैं, अपनी इच्छानुसार गरीबों का कर्ज बढ़ाते हैं, जो कुत्तों के साथ खेलते हैं और जंगल में हिरणों को डराते हैं, जो जहाँ-तहाँ पशुओं की हत्या करते हैं, जिनके घर में अकारण ही लोगों को डराने के लिए कुत्ते पाले जाते हैं, हे प्रिये! ऐसे लोग मरने के बाद यम के दण्ड से पीड़ित होकर बहुत समय तक नरक में रहते हैं। फिर किसी प्रकार मनुष्य योनि प्राप्त करके वे अधिक दुःखों से युक्त तथा सैकड़ों बाधाओं से युक्त घृणित देश में जन्म लेते हैं और वहाँ सब ओर से दुखी, शोकाकुल एवं व्याकुल रहते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.156: अन्धत्व और पंगुत्व आदि नाना प्रकारके दोषों और रोगोंके कारणभूत दुष्कर्मोंका वर्णन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 156: अन्धत्व और पंगुत्व आदि नाना प्रकारके दोषों और रोगोंके कारणभूत दुष्कर्मोंका वर्णन]  »  श्लोक d83-d88
 
 
श्लोक  13.156.d83-d88 
श्रीमहेश्वर उवाच
ये पुरा मनुजा नित्यमुत्कोचनपरायणा:।
भीषयन्ति परान् नित्यं विकुर्वन्ति तथैव च॥
ऋणवृद्धिकराश्चैव दरिद्रेभ्यो यथेष्टत:।
ये श्वभि: क्रीडमानाश्च त्रासयन्ति वने मृगान्।
प्राणिहिंसां तथा देवि कुर्वन्ति च यतस्तत:॥
येषां गृहेषु वै श्वान: त्रासयन्ति वृथा नरान्॥
एवंयुक्तसमाचारा: कालधर्मगता: पुन:।
पीडिता यमदण्डेन निरयस्थाश्चिरं प्रिये॥
कथंचित् प्राप्य मानुष्यं तत्र ते दु:खसंयुता:॥
कुदेशे दु:खभूयिष्ठे व्याघातशतसंकुले।
जायन्ते तत्र शोचन्त: सोद्वेगाश्च यतस्तत:॥
 
 
अनुवाद
श्री महेश्वर बोले - देवी! जो लोग प्रतिदिन घूस लेते हैं, दूसरों को डराते हैं और अपने मन में विकार उत्पन्न करते हैं, अपनी इच्छानुसार गरीबों का कर्ज बढ़ाते हैं, जो कुत्तों के साथ खेलते हैं और जंगल में हिरणों को डराते हैं, जो जहाँ-तहाँ पशुओं की हत्या करते हैं, जिनके घर में अकारण ही लोगों को डराने के लिए कुत्ते पाले जाते हैं, हे प्रिये! ऐसे लोग मरने के बाद यम के दण्ड से पीड़ित होकर बहुत समय तक नरक में रहते हैं। फिर किसी प्रकार मनुष्य योनि प्राप्त करके वे अधिक दुःखों से युक्त तथा सैकड़ों बाधाओं से युक्त घृणित देश में जन्म लेते हैं और वहाँ सब ओर से दुखी, शोकाकुल एवं व्याकुल रहते हैं।
 
Shri Maheshwar said - Devi! Those people who take bribes daily, frighten others and create disorder in their minds, increase the debt of the poor according to their wish, who play with dogs and frighten deers in the forest, who kill animals everywhere, whose dogs are kept in their houses to frighten people for no reason, dear! Such people after death, are afflicted by the punishment of Yama and remain in hell for a long time. Then, after getting birth as a human somehow, they are born in a disgusting country filled with more sorrow and are filled with hundreds of obstacles and remain there unhappy, grief-stricken and troubled from all sides.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)