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mahabharat 13.156.d64-d65: उन्होंने पूछा- हे प्रभु! देवदेवेश्वर! भूतनाथ! मैं आपको नमस्कार करता हूँ। हे प्रभु! अन्य पुरुष छोटे शरीर वाले, टेढ़े-मेढ़े अंगों वाले, कुबड़े, बौने और लंगड़े दिखाई देते हैं। ऐसा किस कर्मफल के कारण होता है? कृपया मुझे यह बताएँ।   |   mahabharat अध्याय 13.156: अन्धत्व और पंगुत्व आदि नाना प्रकारके दोषों और रोगोंके कारणभूत दुष्कर्मोंका वर्णन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.156.d64-d65 
उमोवाच
भगवन् देवदेवेश भूतपाल नमोऽस्तु ते।
ह्रस्वाङ्गाश्चैव वक्राङ्गा: कुब्जा वामनकास्तथा॥
अपरे मानुषा देव दृश्यन्ते कुणिबाहव:।
केन कर्मविपाकेन तन्मे शंसितुमर्हसि॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने पूछा- हे प्रभु! देवदेवेश्वर! भूतनाथ! मैं आपको नमस्कार करता हूँ। हे प्रभु! अन्य पुरुष छोटे शरीर वाले, टेढ़े-मेढ़े अंगों वाले, कुबड़े, बौने और लंगड़े दिखाई देते हैं। ऐसा किस कर्मफल के कारण होता है? कृपया मुझे यह बताएँ।
 
He asked- O Lord! Devdeveshwar! Bhootnath! I salute you. O Lord! Other men appear to be of small bodies, with crooked limbs, hunchbacked, dwarf and lame. Due to which karmic consequence does this happen? Please tell me this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)