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श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 154: अहिंसाकी और इन्द्रिय-संयमकी प्रशंसा तथा दैवकी प्रधानता  »  श्लोक d69
 
 
श्लोक  13.154.d69 
बहिर्निष्क्रमणं चैव कुर्यात् कारणतोऽपि वा।
मध्याह्ने वार्धरात्रे वा गमनं नैव रोचयेत्॥
 
 
अनुवाद
वह किसी विशेष कारण से बाहर भी जा सकता है, लेकिन उसे दोपहर या आधी रात के समय बाहर जाने के बारे में नहीं सोचना चाहिए।
 
He may also travel outside for some special reason, but he should not think of leaving during the afternoon or midnight.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)